*जैनों के -मिच्छामि दुक्कड़म-का अर्थ और महत्व को जाने तो-मिच्छामि दुक्कड़म- प्राकृत भाषा का एक मंत्र है*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】जैनों के घार्मिक पर्व पर्यूषण के आखिरी दिन सभी जैन लोग संवत का सांवत्सरिक प्रतिक्रमण करके पूरे संसार के जीवों की क्षमापना करते हैं और सभी को मिच्छामि दू:कड्डम करते हैं। इसके बारे में विस्तार से जाने। जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व "पर्यूषण"के सबसे विशेष दिन और उसकी महत्वपूर्ण रीति के बारे जानना हैं तो पर्यूषण पर्व का एक संक्षिप्त परिचय । पर्यूषण जिसे "दसलक्षण पर्व" भी कहा जाता है । जैन धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है। यह आठ दिवसीय (श्वेतांबर परंपरा) या दस दिवसीय (दिगंबर परंपरा) उत्सव होता है। इसका शाब्दिक अर्थ है 'निकट आना' या ''निवास करना''। इस अवधि में जैन अनुयायी आत्मशुद्धि,आत्मनिरीक्षण, उपवास,प्रार्थना और धार्मिक उपदेशों के माध्यम से अपनी आत्मा के निकट आते हैं। इस पर्व का उद्देश्य दस प्रमुख धार्मिक गुणों (दस लक्षण) का पालन करना है। जैसे क्षमा, मार्दव (नम्रता),आर्जव (सरलता),सत...
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