*इस 22 सितंबर से केवल जीएसटीके दो स्लैब –5% और 18% ही लागू होंगे*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*इस 22 सितंबर से केवल जीएसटीके दो स्लैब –5% और 18% ही लागू होंगे*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
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【मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई】भारत सरकार ने जीएसटी को लेकर मजबूत कदम उठाते हुए अभी हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में कर संरचना में बड़े बदलाव किए हैं। इसी दौरान 12% और 28% वाले टैक्स स्लैब समाप्त कर दिए गए हैं। इस 22 सितंबर से केवल दो स्लैब –5% और 18% ही लागू होंगे। जीएसटी काउंसिल ने कुल 391 उत्पादों पर फैसला लिया है। जिनमें कई खाद्य पदार्थ,दवाइयां और जीवन जरुरी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। बैठक करीब 10.5 घंटे चली और इसमें केंद्र व राज्यों के मंत्रियों ने आम सहमति से इन बदलावों को मंजूरी दी। जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद दूध, पनीर, रोटी,पराठा, मक्खन,घी,ड्राईफ्रूट्स और मिठाई जैसी रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो जाएगी। इसी दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद लंबे समय से जीएसटी रेट रैशनलाइजेशन पर काम कर रहे थे और अब समय की मांग को समझते हुए यह बड़ा बदलाव किया गया है। दौरान क्या क्या हुआ महंगा? 40% स्पेशल स्लैब में एसी,फ्रिज,टीवी 32 इंच तक के,लग्जरी कार और बड़ी एसयूवीसीमेंट,वॉशिंग मशीन,शुगर ड्रिंक्स और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स,ट्रैक्टर,खेती की मशीनें,शराब,बीड़ी और तंबाकू उत्पाद,दवाइयाँ, घी,मक्खन,पान मसाला,गुटखा,तंबाकू,बीड़ी,शराब, शुगर ड्रिंक्स और लग्जरी कारों को 40% स्पेशल टैक्स स्लैब में रखा गया है। निजी उपयोग वाले एयरक्राफ्ट, यॉट और बड़ी मोटरसाइकिलें जो 350 सीसी से ऊपर हैं भी इस कैटेगरी में शामिल होंगी।

फास्ट फूड,कैफिनेटेड पेय तो दूध यूएचटी, छेना,पनीर प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। रोटी,चपाती,पराठा और पिज्जा ब्रेड को भी जीएसटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। मक्खन,घी,बटर ऑयल, चीज, कंडेंस्ड मिल्क,कोको पाउडर, चॉकलेट,आटा-मैदा से बने तैयार खाद्य उत्पाद, पास्ता,नूडल्स,केक,बिस्किट,आइसक्रीम आदि पर टैक्स 18% या 12% से कम करके 5% कर दिया गया है साथ में खजूर,अंजीर,आम,संतरा,नींबू जैसे सूखे फलों, ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, पिस्ता,हेजलनट, पाइन नट्स आदि पर भी अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। चीनी, गुड़,शुगर सिरप पर 12 फीसदी से टैक्स घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। मिठाई, नमकीन, जैम, जेली, आचार,सॉस,आइसक्रीम जैसी चीजों पर भी अब केवल 5% जीएसटी। तो 5 से 0 में जाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे यूएचटी दूध, छेना और पनीर,सभी भारतीय ब्रेड्स, रोटी,पराठा, चपाती पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 12-18 से पांच फीसदी पर आने वाली आइटम खाने के आइटम सॉस,पास्ता,कॉर्नफ्लेक्स,घी,बटर,इंस्टैंट नूडल्स, चॉकलेट,कॉफी और प्रीजर्व्ड मीट शामिल हैं। सॉसेज, मांस प्रोडक्ट्स,फिश कैवियार,समुद्री भोजन पर व तेंदू पत्ता,काथा और अन्य हर्बल उत्पाद,माल्ट,स्टार्च, सब्जियों से बने थिकनर और ग्लिसरॉल पर भी जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया। एनीमल फैट्स,मछली का तेल,घी जैसे पशु तेलों पर अब केवल 5% टैक्स लगेगा। मानवनिर्मित धागों (यार्न) पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया। मानव निर्मित फाइबर पर भी टैक्स 18% से घटाकर 5% किया गया। इससे कपड़ा उद्योग को फाइबर-न्यूट्रल नीति मिलेगी। ट्रैक्टर, थ्रेशिंग मशीनें और अन्य कृषि उपकरणों पर टैक्स 12% से घटाकर 5% किया गया। फर्टिलाइजर सेक्टर में सल्फ्यूरिक एसिड,नाइट्रिक एसिड और अमोनियम पर टैक्स 18% से घटाकर 5% किया गया। बायोगैस प्लांट, विंडमिल, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, सोलर कूकर और सोलर वॉटर हीटर जैसे उपकरणों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया हैं। संरचनात्मक सरलीकरण को देखते हुए चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को प्रभावी रूप से दो स्लैब (5% और 18%) में समेकित किया गया।
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जीएसटी परिषद की बैठक में केंद्र और राज्य के वित्त मंत्री जीएसटी सुधारों के एक ही एजेंडे पर चर्चा के लिए एक साथ आते हैं, जिसमें दरों को युक्तिसंगत बनाना, सरल अनुपालन और संभावित नए मुआवज़ा तंत्र शामिल हैं। व्यापार करने में आसानी में वृद्धि होगी। कम श्रेणियों के साथ अनुपालन आसान हो जाएगा। मुकदमेबाजी कम होगी और प्रशासन सुव्यवस्थित होगा। राजस्व तटस्थता देखें तो पाप/विलासिता वस्तुओं पर 40% स्लैब का उद्देश्य निचले स्लैब से होने वाले नुकसान की भरपाई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान जुलाई 2017 के बाद से भारत के सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार की घोषणा की थी। जब माल और सेवा कर पहली बार लागू हुआ था । इसके बाद के दिनों में भारत के शेयर बाजार में तेजी आई थी लेकिन दो सप्ताह से भी कम समय बाद भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू होने से यह बढ़त उलट गई थी। संक्षेप में जीएसटी सुधार उस झटके के लिए एक कुशन है। जो भारतीय अर्थव्यवस्था को रूसी तेल की नई दिल्ली की खरीद पर ट्रम्प के टैरिफ तीखे हमलों के कारण लगेगा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार अकेले जीएसटी सुधार अगले 12 महीनों में भारत के जीडीपी प्रिंट में 60 आधार अंक जोड़ सकते हैं । जबकि अमेरिकी टैरिफ समय के साथ विकास को 1 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं । ऐसा रॉयटर्स ने एमयूएफजी विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया था।

एक आधार बिंदु एक प्रतिशत बिंदु का सौवां हिस्सा है। यदि परिषद 12% से 5% माइग्रेशन के साथ-साथ तर्कसंगत 28% से 18%/40% विभाजन प्रदान करती है । अगर टैरिफ़ ज़्यादा कड़े/लंबे होते हैं तो यह असर 1 पीपीटी तक पहुँच सकता है। जीएसटी इसमें मदद तो करता है लेकिन इसे पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाएगा। एसबीआई को उम्मीद है कि भारित औसत जीएसटी दर घटकर 9.5% हो जाएगी । जिससे खुदरा मुद्रास्फीति 20-25 आधार अंकों तक कम हो जाएगी और खपत बढ़ेगी। इससे मासिक जीएसटी संग्रह में भी बढ़ोतरी होगी। जीएसटी सुधारों के कारण राजस्व में कमी होगी। आईडीएफसी फ़र्स्ट बैंक का अनुमान है कि अगर जीएसटी 2.0 को दो-स्तरीय ढाँचे (5% और 18%) में बदल दिया जाता है और जिसमें 40% "पाप/विलासिता" बैंड होगा तो एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इससे राजस्व में 60,000 करोड़ से 1.1 लाख करोड़ रुपये तक की कमी आएगी। एसबीआई का तर्क है कि इस राशि में से 45,000 करोड़ रुपये को मार्च 2026 तक जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर निधि में अनुमानित 45,581 करोड़ रुपये के अधिशेष का उपयोग करके बेअसर किया जा सकता है लेकिन इसके बिना भी उपभोग को बढ़ावा देने से राजस्व की भरपाई हो सकती है।【Photos Courtesy Google】
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