*पितृ पूजन एवं श्राद्ध पक्ष का भारत में महत्व, 8 सितंबर से श्राद्ध की शुरुआत होगी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*पितृ पूजन एवं श्राद्ध पक्ष का भारत में महत्व, 8 सितंबर से श्राद्ध की शुरुआत होगी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
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【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】भारत की प्राचीन परंपराओं और वैदिक संस्कृति में पितृ पूजन और श्राद्ध पक्ष जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है। उसका अत्यंत विशेष महत्व है। यह काल हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक 16 दिनों का होता है। महत्व और उद्देश्य देखें तो पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना। मान्यता है कि इस समय पितृलोक के द्वार खुलते हैं और पितरों की आत्माएँ अपने वंशजों के आह्वान पर पृथ्वी पर आती हैं। श्राद्ध,तर्पण और पिंडदान से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
ऋण मोचन और कृतज्ञता का एहसास। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य तीन प्रकार के ऋणों के साथ जन्म लेता है। देव ऋण,ऋषि ऋण और पितृ ऋण। श्राद्ध करना पितृ ऋण से मुक्ति का माध्यम है और पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर है। गरुड़ पुराण और मनुस्मृति के अनुसार पितरों का पूजन करना संतान का धार्मिक कर्तव्य है। जो संतान पितरों का श्राद्ध करती है। उसे जीवन में सुख-शांति, दीर्घायु और वंश की वृद्धि का फल मिलता है। आध्यात्मिक और पारिवारिक जुड़ाव होता है। इस अवसर पर परिवारजन एकत्र होकर पूर्वजों को याद करते हैं। जिससे पीढ़ियों के बीच संबंध और संस्कार जीवित रहते हैं। यह परिवार को अपनी जड़ों और परंपरा से जोड़े रखने का माध्यम भी है।
•प्रमुख अनुष्ठानों में तर्पण: 
जल और तिल मिश्रित अर्पण करके पितरों की तृप्ति करना।
• पिंडदान: 
आटे या चावल के गोले बनाकर पूर्वजों को समर्पित करना।
• ब्राह्मण व गौ सेवा: 
भोजन कराना, दान देना और सेवा करना।
•सात्त्विक आहार: 
इस अवधि में लोग मांसाहार, मदिरा और तामसिक आहार से परहेज़ करते हैं। संक्षेप में पितृ पूजन और श्राद्ध पक्ष भारत में केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा,कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों को संजोने का महापर्व है।
◆पितृ पूजन एवं श्राद्ध पक्ष का महत्व :
 -समय: भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक कुल 16 दिनों तक श्राद्ध का वक़्त होता है।
- उद्देश्य: पूर्वजों का स्मरण, तर्पण व पिंडदान द्वारा आशीर्वाद प्राप्त करना ।
-धार्मिक मान्यता: पितरों की आत्माएँ इस अवधि में पृथ्वी पर आती हैं।
-ऋण मोचन: पितृ ऋण से मुक्ति और वंश की उन्नति का मार्ग।
-मुख्य अनुष्ठान: तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन व गौ सेवा।
-जीवन लाभ: सुख-शांति, संतान सुख और परिवार की समृद्धि।
-संस्कार: परिवार को जड़ों और परंपरा से जोड़ने का पर्व।
इस साल पितृ पूजन एवं श्राद्ध पक्ष  दिनांक 08/9/2025 भादरवा वद 1 सोमवार से श्राद्ध शुरू होगाऔर  दिनांक 21/09/2025 भादरवा वद 30 रविवार श्राद्ध पक्ष समाप्त होंगे। दौरान साथ में होगा सौभाग्यवती स्त्री श्राद्ध,संन्यासी का श्राद्ध;किसी घायल व्यक्ति का श्राद्ध, सर्वपितृ अमावस्या एवं पूनम अमावस्या श्राद्ध ।

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#श्राद्ध#देव ऋण#ऋषि ऋण#पितृ ऋण#भाद्रपदपूर्णिमा# आश्विनअमावस्या#गरुड़ पुराण#मनुस्मृति#पितरोंका पूजन #संतानकाधार्मिक कर्तव्य 

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