*संपत्ति पंजीकरण नियम: नए नियम लागू, 5 डॉक्यूमेंट नहीं तो रजिस्ट्री कैंसिल*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*संपत्ति पंजीकरण नियम: नए नियम लागू, 5 डॉक्यूमेंट नहीं तो रजिस्ट्री कैंसिल*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई】भारतीय संपत्ति बाजार में 2025 की शुरुआत से एक नया युग प्रारंभ हो चुका है। केंद्र सरकार ने भूमि एवं अचल संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े कई आधुनिक और परिवर्तनकारी प्रावधान लागू कर दिए हैं। इन प्रावधानों का मूल उद्देश्य जमीन- जायदाद की खरीद-फरोख्त को अधिक सुगम, विश्वसनीय और कुशल बनाना है। परंपरागत तरीकों से होने वाली लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया को अब पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था से क्रेता और विक्रेता दोनों को समान रूप से फायदा होगा। साथ ही भूमि विवादों, कानूनी झगड़ों और धोखाधड़ी की समस्याओं में भी काफी कमी आने की संभावना है। सरकार ने विशेष दस्तावेजों को अनिवार्य घोषित करते हुए संपत्ति के स्वामित्व की पुष्टि को और मजबूत बनाया है।
•डिजिटल क्रांति का आगमन:
नवीन प्रावधानों के साथ भारतीय संपत्ति व्यवस्था में प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग शुरू हो गया है। अब संपत्ति पंजीकरण में आधार आधारित प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक पहचान, और संपूर्ण प्रक्रिया का वीडियो दस्तावेजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इन तकनीकी उपायों से दोनों पक्षों की असली पहचान सुनिश्चित होगी और नकली लेनदेन पर रोक लगेगी।
यह आधुनिक व्यवस्था मुख्य रूप से प्रत्येक संपत्ति हस्तांतरण को सही तरीके से अभिलेखित करने और भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी कानूनी परेशानी के लिए ठोस साक्ष्य प्रदान करने हेतु बनाई गई है। डिजिटल माध्यम से होने वाले इन लेनदेनों में नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे धन और समय दोनों की महत्वपूर्ण बचत होगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।
•भूमि पंजीकरण का महत्व एवं आवश्यकता:
संपत्ति पंजीकरण का अर्थ है किसी जमीन या मकान के स्वामित्व अधिकार को सरकारी अभिलेख में औपचारिक तौर पर दर्ज कराना। यह प्रक्रिया खरीदार को उस संपत्ति का वैध मालिक बनाती है और कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है। पहले के समय में इस प्रक्रिया में अत्यधिक कागजी औपचारिकताएं होती थीं जिससे धोखाधड़ी और जालसाजी की घटनाएं आम थीं।
नए प्रावधानों ने इस पूरे तंत्र को डिजिटल स्वरूप देकर अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बना दिया है। अब पंजीकरण के दौरान जरूरी कागजातों का होना अनिवार्य है ताकि भूमि से संबंधित सभी विवरण सही ढंग से दर्ज हों। प्रत्येक दस्तावेज की ऑनलाइन जांच-पड़ताल होगी और खरीदार तथा विक्रेता का आधार से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण भी होगा। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी जो भविष्य में प्रमाण के रूप में काम आएगी।
•पांच आवश्यक कागजात:
नवीन नियमों के तहत भूमि पंजीकरण के लिए पांच प्रमुख दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। पहला कागजात है । आधार कार्ड या कोई मान्य सरकारी पहचान पत्र जो दोनों पक्षों की पहचान स्थापित करता है। दूसरा जरूरी दस्तावेज पैन कार्ड है । जो कर से जुड़ी जानकारी और आर्थिक लेनदेन की वैधता को दर्शाता है। तीसरा महत्वपूर्ण कागजात भूमि संबंधी दस्तावेज हैं जैसे खसरा-खतौनी,पट्टा या अन्य कोई मान्य अभिलेख जो जमीन की मौजूदा स्थिति और स्वामित्व को प्रमाणित करता है। चौथा आवश्यक दस्तावेज उपयोगिता बिल है। जैसे बिजली,पानी या सेवा कर का बिल जो यह बताता है कि उस संपत्ति का वर्तमान में कौन उपयोग कर रहा है? पांचवा और अत्यंत जरूरी कागजात संपत्ति का मूल्यांकन प्रमाणपत्र या सर्किल रेट प्रमाणपत्र है। यह दस्तावेज जमीन की विक्रय कीमत को सरकारी मानदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करता है और अवैध लेनदेन को रोकता है। इन पांच दस्तावेजों के बिना भूमि का पंजीकरण मान्य नहीं होगा।
•अतिरिक्त जरूरी चीजें:
मुख्य पांच कागजातों के अतिरिक्त,खरीदार और विक्रेता की हालिया पासपोर्ट आकार की रंगीन तस्वीरें, बिक्री समझौते की प्रमाणित प्रतिलिपि और तय स्टांप शुल्क का संपूर्ण भुगतान भी अनिवार्य है। सरकारी अधिकारी बहुत कड़ाई से जांच कर रहे हैं ताकि नकली दस्तावेजों या फर्जी पहचान से अवैध पंजीकरण न हो सके।
इस नए प्रावधान की वजह से जमीन के व्यापार की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन गई है। सरकार चाहती है कि हर सौदे में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही हो। इससे आम नागरिकों का विश्वास भूमि बाजार में बढ़ेगा।
•सरकारी पहल के फायदे:
फरवरी 2025 से सरकार ने जमीन पंजीकरण के ये नियम औपचारिक रूप से लागू कर दिए हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपत्ति पंजीकरण की सुविधा देती है। इस योजना में ऑनलाइन फॉर्म भरना,कागजात अपलोड करना,आधार लिंकिंग, बायोमेट्रिक जांच, वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
इससे संपत्ति कारोबार में पारदर्शिता आई है और नकली पंजीकरण तथा जालसाजी की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह व्यवस्था सभी संपत्ति खरीदारों और विक्रेताओं के लिए लाभदायक है क्योंकि इससे समय की बचत होती है और भ्रष्टाचार कम होता है। नए नियमों के कारण भूमि माफिया और ठगों द्वारा अवैध खरीद-फरोख्त पर प्रभावी रोक लग पाई है।
•आवेदन की विधि:
पंजीकरण कराने के लिए सबसे पहले सुनिश्चित करें कि उपरोक्त पांच आवश्यक दस्तावेज आपके पास सही और वैध हों। इन कागजातों को अच्छी गुणवत्ता में स्कैन करें और डिजिटल फाइल तैयार रखें। इसके बाद अपने राज्य के भूमि पंजीकरण पोर्टल या उप-रजिस्ट्रार कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
वहां ऑनलाइन आवेदन फॉर्म ध्यानपूर्वक भरें और सभी दस्तावेज अपलोड करें। आधार कार्ड से लिंक कराएं और बायोमेट्रिक सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करें। ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण शुल्क जमा करें। सब कुछ पूरा होने के बाद आपको पंजीकरण का डिजिटल प्रमाणपत्र प्राप्त होगा। आज के नए नियमों के साथ जमीन का पंजीकरण पहले से कहीं अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी हो गया है। पांच अनिवार्य दस्तावेज तैयार रखना और डिजिटल प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। यह व्यवस्था धोखाधड़ी रोकने और खरीदारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी संपत्ति लेनदेन से पहले अपने राज्य के राजस्व विभाग या आधिकारिक पोर्टल से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें।【Photo Courtesy Google】
ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•
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