*मुंबई में आईएमडी का येलो अलर्ट था, रायगढ़ में बारिश तेज़ होने का ऑरेंज अलर्ट भी था*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*मुंबई में आईएमडी का येलो अलर्ट था, रायगढ़ में बारिश तेज़ होने का ऑरेंज अलर्ट भी था*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】महाराष्ट्र का मुंबई शनिवार व रविवार लगातार भारी बारिश की आशंका के साथ तैयार था। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानि आईएमडी ने मुंबई,ठाणे और पालघर के लिए येलो अलर्ट और रायगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। मुंबई में दो दिनों से लगातार हुई बारिशने पहले ही भारी जलभराव और व्यवधान पैदा कर दिया है । बेहतर जलवायु लचीलापन और मज़बूत शहरी बुनियादी ढाँचे की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। ये मौसमी घटनाएँ शहरी जीवन की स्थिरता को चुनौती देती हैं और पर्यावरण के अनुकूल और न्यायसंगत शहरी नियोजन की अनिवार्यता को उजागर करती हैं। मौसम विभाग की सलाह तीव्र मौसम के दौर का संकेत थी। मुंबई में शनिवार  व रविवार को अच्छी-खासी बारिश हुई थी। शनिवार सुबह 8 बजे से रात 10 बजे के बीच शहर में औसतन 6.80 मिमी, पूर्वी उपनगर में 11.53 मिमी और पश्चिमी उपनगर में 7.42 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद शनिवार को पालघर के लिए रेड अलर्ट और मुंबई,ठाणे और रायगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था । जो महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश और गोवा के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश का संकेत दे रहे थे । इस गंभीर मौसम का असर शहरी केंद्रों से आगे तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश में डिंडोरी से जबलपुर मार्ग पर स्थित जोगिटिकरिया पुल भारी बारिश के कारण डूब गया था। जिससे नर्मदा नदी उफान पर आ गई और यातायात को डायवर्ट करना पड़ा था। यह घटना साथ ही पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ पर पश्चिम की ओर बढ़ते एक दबाव के आईएमडी के पूर्वानुमान इस मौसम प्रणाली की व्यापक प्रकृति और कई राज्यों में संपर्क और आजीविका को बाधित करने की इसकी क्षमता को उजागर करती है। ऐसी चरम मौसम घटनाएँ शहरी बुनियादी ढाँचे, विशेष रूप से जल निकासी प्रणालियों और सड़क नेटवर्क के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश करती हैं।  मानसून के मौसम में मुंबई जैसे बड़े शहरों में बार-बार होने वाले जलभराव के कारण शहरी नियोजन का पुनर्मूल्यांकन और जलवायु-अनुकूल समाधानों के कार्यान्वयन की आवश्यकता है। हरित बुनियादी ढाँचे जैसे पारगम्य सतह और बेहतर तूफानी जल प्रबंधन में निवेश बाढ़ के जोखिमों को कम करने और आवश्यक सेवाओं के निरंतर संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो कि संवेदनशील आबादी सहित सभी नागरिकों के कल्याण के लिए आवश्यक है। चल रहा मानसून का प्रकोप जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और सक्रिय अनुकूलन रणनीतियों की अनिवार्यता की एक स्पष्ट याद दिलाता है। शहरों को टिकाऊ विकास की दिशा में अपने प्रयासों में तेजी लानी चाहिए, जिसमें मज़बूत आपदा तैयारी,पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ और सामुदायिक स्तर के लचीलापन कार्यक्रम शामिल हों। पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढाँचे और संसाधनों तक समान पहुँच को प्राथमिकता देकर शहरी क्षेत्र प्रकृति की अप्रत्याशित शक्तियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकते हैं। जिससे उनके निवासियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित हो सके।
【Photos Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#बारिश#मुंबई# पालघर#रायगढ़# यलोअलर्ट#ठाणे#महाराष्ट्र# छत्तीसगढ़#मध्य प्रदेश#गोवा

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