तो रेलवे में 168 साल पुराना कुरियरमैन सिस्टम बंद होगा / रिपोर्ट स्पर्श देसाई


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【मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】


कुरियरमैन से डाक के बजाय ऑनलाइन भेजी जाएंगी फ़ाइलें । टीए-डीए की होगी बचत, विभागीय कामकाज़ निपटाएंगे कर्मचारी ।  फ़ील्ड यूनिटों और मंडल कार्यालयों से मुख्यालय और रेलवे बोर्ड तक फाइलें और डाक ले जाने वाले के लिए अंग्रेज़ी हुक़ूमत के दौर से चल रहा कुरियरमैन सिस्टम अब जल्द ही बंद हो सकता है। लॉकडाउन के दौरान समीक्षा के बाद रेलवे 168 साल पुराना सिस्टम बंद करने पर विचार कर रहा है। ऐसे में अब कुरियरमैन से डाक भिजवाने के बजाय ऑनलाइन फाइलें भेजी जाएंगी। वहीं, रेल मंत्रालय ने अफसरों की विदेश यात्राओं पर भी कैंची चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। रेलवे ने गैर-ज़रूरी खर्चों में कटौती के लिए कई अहम प्रपोज़ल तैयार किए हैं। कंसेप्ट पेपर के तहत कुरियरमैन सिस्टम बंद होने से सैकड़ों कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाला टीए-डीए भी बंद हो जाएगा। यही नहीं, ये कर्मचारी अब विभागीय कामकाज़ निपटाने में मदद करेंगे तो इसके लिए आरक्षित होने वाली सीटें यात्रियों को मिल सकेंगी। प्रपोज़ल है कि अब अति महत्वपूर्ण फाइलों के लिए ही कूरियरमैन को भेजा जाएगा। 

विदेश यात्रा पर भी चल सकती है कैंची ; 
रेलवे के ज़्यादातर अफ़सर विदेशी तकनीक और रेलवे सिस्टम समझने के लिए हर साल विदेश भेजे जाते हैं। कोरोना महामारी के बाद रेलवे ने इन विदेश यात्राओं पर कैंची चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। अफ़सरों की स्टडी लीव, विदेश यात्राओं के अलावा देश की हवाई यात्राओं में भी कटौती की जा सकती है।

 घटेंगे पीआरएस काउंटर :
 रेलवे में ऑनलाइन आरक्षण की बढ़ती डिमांड के कारण आरक्षण केंद्रों पर काउंटर भी घटाए जाएंगे। इन काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों की ड्यूटी कमर्शल विभाग में ही दूसरी जगह लगाई जाएगी। इसके अलावा सरप्लस कैडर और कर्मचारियों की दूसरे विभाग में दोबारा तैनाती की जाएगी।
 
नई नियुक्तियों पर रोक भी आशंका ;
रेलवे ने कोविड-19 के ख़तरे को देखते हुए डॉक्टरों, नर्सों व पैरामेडिकल स्टाफ को छोड़कर अन्य सभी नई नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसी क्रम में रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्त कर्मचारियों की भी छुट्टी की जा रही है। उत्तर रेलवे ने पहल करते हुए 129 कर्मचारियों को हटा दिया है। डेप्युटेशन पर भेजे जाएंगे अफसर  रेलवे ने कहा है कि ग़ैर ज़रूरी पदों पर तैनात अफ़सर और कर्मचारी अगर डेपुटेशन पर जाना चाहते हैं तो उन्हें जाने दें। इससे ये अधिकारी और कर्मचारी संबंधित विभाग में बेहतर सेवा दे सकेंगे तो रेलवे में पद भी गैर ज़रूरी पद खाली होंगे और जिससे विभाग पर उनके वेतन का बोझ भी नहीं पड़ेगा। अभी यह कंसेप्ट पेपर तैयार किया गया है अगर इन पर मंज़ूरी मिल जाती है तो उसे लागू किया जाएगा। ऐसा संजय त्रिपाठी, 【डीआरएम, उत्तर रेलवे】ने बताया था ।


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