कॅरोना काल व तालाबन्दी - हमारे देश में, इन दोनों ने देश की परिस्थिति चिन्तनीय बना दी हैं / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

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                 【मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】


कॅरोना काल व तालाबन्दी - हमारे देश की बात करे तो इन दोनों ने देश की परिस्थिति चिन्तनीय बना दी हैं । अब दोनों एक सिक्के के दो पहलू बन गए है अगर दोनो का टॉस किया जाए हेड़ या टेल ? मुझे तो दोनो में बर्बादी ही नजर आ रही है । लोक डाउन अब 17 मई के बाद आगे खींचा जाता है तो भी अर्थ व्यवस्था सम्पूर्ण बर्बादी की ओर चली जायेगी और ताला बन्दी खोली जाए तो संक्रमण का खतरा 100 प्रतिशत बढेगा । अब आप खुद कहेंगे सरकार क्या करे तो एक बात साफ है कि ताला बंधी सम्पूर्ण रूप से सफल नही हुई । हिंदुस्तान की प्रजा ने इसको गंभीरता से नही लिया और न ही इसे सरकार ने गंभीरता से लिया अगर तालाबन्दी पूरी सक्रिय रूप से होती तो हमे तालाबन्दी 3.0 की भी जरूरत नही पड़ती । तालाबन्दी के बाद भी आकंड़े आसमान छू रहे है । आम जनता सड़को पर किसी न किसी बहाने सड़को पर घूमती नजर आ रही है । छह दिन ओर बचे है तालेबन्दी 3.0 के तब तक न जाने आंकड़े कँहा तक पहुच जाएंगे ?  क्या केंद्र सरकार व राज्य सरकारे तालाबन्दी 4.0 की ओर बढ़ेगी ? अगर तालाबन्दी ओर बढ़ती है लोग भूख , मानसिक तनाव , बेरोजगारी , बीमारी से मरेंगे । आम जनता भविष्य को लेकर चिंतित है ।सबसे ज्यादा मध्यम व्यापारी व निम्न व्यापारी वर्ग चिंतित है ।साथ मे सूरत का कपड़ा बाजार जो जीएसटी के बाद से मृत प्राय है वेंटिलेटर पर जो टेक्सटाइल उद्योग पहले से है । लोक डाउन 4.0 अगर लग गया तो समझो वेंटिलेटर हट गया और उसके बचने के चांस 20 से 30 प्रतिशत ही है, क्यों कि मजदूर वर्ग उत्तर प्रदेश , बिहार , उड़ीसा जिनकी महत्वपूर्ण भूमिका है । वो गांवो की ओर पलायन कर चुके है और बचे हुए पलायन के जुगाड़ में लगे हुए है । जिनका 70 प्रतिशत मजदूर दीपावली के बाद शायद सूरत की ओर रुख करे । 30 प्रतिशत उन्ही प्रदेशो में रोजगार में लग जाएंगे ।  मुझे टेक्सटाइल का विनाश स्पष्ट दिख रहा है क्यों कि भले हम टेक्सटाइल से नही जुडे हैं  पर निकटता  बहुत है भलीभांति परिचित हैं कितने व्यापारी आज चिंतित है ? जिनका रक्तचाप उच्च स्थिति की ओर गतिमान है ।भाड़े , मेंटेनेंस , पगार का बोझ ,टैक्स , ईएमआई , ब्याज , ऊंचा रहन सहन , इनकी कॅरोना से ज्यादा महामारी लग रही है । अब सरकार तालाबन्दी 3.0 के बाद क्या निर्णय लेती है वो किसी को भी नही मालूम ।मगर स्थिति का सही आकलन करे स्थिति भयंकर होगी ।मार्किट खुल भी जाये तो बाहर से पेमेंट 30 प्रतिशत भी आ जाये तो बड़ी उपलब्धि होगी । अब एक ही सहारा अगर सरकार टेक्सटाइल व अन्य व्यापारी वर्ग के लिये कोई बड़ी राहत पैकेज की घोषणा करे जिसमे जीएसटी से पूर्ण मुक्ति , ओर  इएमआई 6 माह से मुक्ति , लोन का कुछ प्रतिशत माफी तब जाकर टैक्सटाइल्स व अन्य व्यापार को बचाया जा सकता है मगर जीएसटी सरकार का मुख्य आय का साधन है । सरकार चाह कर भी इससे मुक्त नही कर सकती हैं । सकता है कि कुछ सरलीकरण करे, मगर अंधकारमय भविष्य आँखों के सामने नजर आ रहा है ।सरकार भी चिंतित है मगर निर्णय नही ले पा रही है । ऐसा महसूस हो रहा है अगर ताला बन्दी 4.0 हुई निश्चित तौर पर कॅरोना पर अंकुश पा सकेंगे या नही ? पर व्यापार उद्योग पूरे गर्त में चले जायेंगे ।  यह सुनिश्चित है सरकार पक्ष विपक्ष सभी राजनीतिक महत्वकांशा छोड़ संयुक्त कमेटी का गठन कर एक समिति बनाये और निष्कपट भावना से व्यापारी वर्ग , मजदूर वर्ग के हितों का सरंक्षण करे ओर तालाबन्दी 3.0 के बाद गाइडलाइन  जारी करके खोल दिया जाए । लाइफ लाइन रेलवे व ट्रंसपोर्ट को विधिवत शुरू करे । तब हम सभी भारतवासी की दशा फिर पटरी पर धीरे धीरे गतिमान हो ।  चिंतन हमे ओर हमारे देश की सरकार को करना है इस दोनो समस्या से कैसे बाहर निकलना है ।【मूल लेखक उत्तम जैन (विद्रोही)। कुछ बदलाव के साथ प्रस्तुत - साभार ।】




रिपोर्ट स्पर्श देसाई √●Metro City Post●News Channel●के लिए...

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