विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय का प्रस्ताव आखिरकार हुआ खारिज / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

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       【मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】


 विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय किए जाने के प्रस्ताव को कार्यपरिषद ने आखिरकार खारिज कर दिया था । विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव के साथ ही इसका विरोध शुरू हो गया था । यहां तक कि छात्र नेताओं का एक समूह हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी में भी था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर रजिस्टार प्रोफेसर ए के शुक्ला ने कार्य परिषद के 15 सदस्यों को ईमेल पर नाम बदलने के मुद्दे पर उनकी राय मांगी थी। सदस्यों को 2 दिन में ईमेल पर अपनी राय भेजनी थी। वहीं विवि के पूर्व उपाध्यक्ष ने राष्ट्रपति को खून से खत लिख कर नाम न बदलने की मांग की थी।

कार्य परिषद के सदस्यों को दिए गये प्रस्ताव के मुताबिक़ सभी को निर्धारित समय में 15 सदस्यों को अपनी राय भेजेने को कहा गया था। जिनमें से 12 सदस्यों ने विश्वविद्यालय के नाम को बदलने का विरोध करते हुए कहा कि नाम बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। जो नाम है वही रहने दिया जाए । सदस्यों ने नाम बदलने से होने वाली तमाम परेशानियों का जिक्र भी अपने जवाब में किया है। सदस्यों ने कहा है कि इससे न केवल वर्तमान छात्र बल्कि पूरा छात्रों को और शोधार्थियों को भी तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

कुछ शिक्षकों ने अपने सुझाव में यह भी बताया है कि कई शहरों के नाम बदले जाने के बावजूद भी विश्वविद्यालयों के नाम में परिवर्तन नहीं किया गया है। ऐसे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम के बदलाव की आवश्यकता नहीं है। विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि जिन 12 सदस्यों के बाद मिले हैं । उन्हें एचआरडी मंत्रालय को भेज दिया गया है । पीआरओ के मुताबिक़ सभी 12 सदस्यों के नाम बदलने नाम बदलने का विरोध किया है।

वही इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम बदले जाने को लेकर तमाम छात्र संगठन आक्रोशित हो गये । सब ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व उपाध्यक्ष आदिल हमजा ने अपने खून से राष्ट्रपति को खत लिखकर नाम बदलने की गुहार लगाई थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी सनत मिश्रा ने उन सभी 12 शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है । जिन्होंने नाम ना बदलने का सुझाव मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दिया हैं। पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति समेत सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है ।


इलाहबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमज़ा ने लिखा था राष्ट्रपति और मानव संसाधन विकास मंत्री को रक्त से पत्र । पत्र के जरिये अदील हमज़ा ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदलने को लेकर चल रही कार्यवाही का किया था विरोध । अदील हमजा ने पत्र के माध्यम से  कहा था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय सिर्फ नाम नहीं है,
यह सदियों  की गौरव गाथा समेटे हुए एक राष्ट्रीय धरोहर है  । ः

जैसे तक्षशिला नालंदा कैंब्रिज ऑक्सफोर्ड इत्यादि!इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम के साथ छेड़छाड़ लाखों पुरा छात्र और हजारों वर्तमान छात्रों के पुरुषार्थ को चुनौती होगी । युवा शक्ति की धैर्य परीक्षा ना लें वरना ऐसा सैलाब आ जाएगा जिसमें सभी अहंकारी सत्ताए विलीन हो जाएंगी ।

रिपोर्ट स्पर्श देसाई √ ●Metro City Post●News Channel●के लिए...

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